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Nipah Virus Symptoms & Ayurveda Prevention Tips

Nipah-Virus

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निपाह वायरस (NiV) से बच सकते हैं कुछ विशेष सावधानियों से !
अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को कमजोर न होने दें व अपने पाचन का रखें विशेष ख्याल !

कुछ समय से निपाह वायरस के नाम से एक रोग काफी तेजी से फ़ैल रहा है, भारत में भी कुछ राज्यों में इसने दस्तक दे दी है जिसके कारण कुछ लोगों की मृत्यु भी हुई है, चमगादड़ व सुअर के माध्यम से यह रोग मानव शरीर में फैलता है!

इस रोग में शरीर के दो हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं – फेफड़े (lungs ) व मस्तिष्क (brain ), इस रोग के कारण पीड़ित व्यक्ति को तेज़ बुखार व कोमा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अभी इस रोग का कोई स्थाई उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन यदि हम अपने शरीर का पहले से ही उचित ध्यान रखें तो इस रोग या इस तरह के किसी भी रोग से पीड़ित होने से बचा जा सकता है। अधिकांश स्थितियों में संक्रामक रोग उन लोगों को होते हैं जिनका व्याधिक्षमत्व / शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System ) कमजोर होता है, शरीर के पाचन तंत्र का ठीक न होना भी संक्रामक रोगों से पीड़ित होने का विशेष कारण है, इसलिए किसी भी संक्रामक स्थिति से बचने के लिए निम्न बातों का हमेशा ध्यान रखें:

1. पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पियें, जिससे आपका शरीर डिहाइड्रेशन से ग्रस्त न हो।
2. खुली व गन्दी जगहों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों को बिल्कुल न खायें।
3. घर के बाहर से आने पर हमेशा अपने हाथ-पैरों को अच्छे से साफ़ करें।
4. सामान्य स्थिति में भी अपने हाथों को साफ़ करके ही खायें।
5. फल व सब्जियों को कच्चे कभी न खायें, फलों को अच्छे से जाँचकर पर मौसम के फलों का ही सेवन करें, सब्जियों को अच्छे से उबालकर ही सेवन करें।
6. कच्चे मांस का सेवन व अधिक मात्रा में शराब का सेवन न करें, इससे शरीर का व्याधिक्षमत्व सीधे तौर पर प्रभावित होता है।
7. कच्चा दूध व अशुद्ध जल का सेवन न करें, अच्छे से उबला हुआ दूध व उबला हुआ पानी औषधि के समान होता है, इस रूप में ही इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है।
8. कई दिनों का उपवास (लम्बे समय का उपवास) न करें इससे शरीर की धातुयें क्षीण होती हैं जिससे शरीर जल्दी बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों व फल, सब्जियों व दूध का सेवन करते रहें।
9. आयुर्वेद में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बरक़रार रखने व पाचन को बेहतर रखने के कई उपचार व तरीके उपलब्ध हैं, इसके लिए अपने नजदीक के आयुर्वेद चिकित्सक से मिलकर परामर्श करें।
10. किसी भी तरह की सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार आदि का उपचार स्वयं से किसी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर न करें, ऐसी स्थितियों में आयुर्वेद में शीघ्र असर करने वाला व स्थाई उपचार उपलब्ध है, अपने पास के आयुर्वेद चिकित्सक से इसकी चिकित्सा करवायें।
11. आयुर्वेद की कुछ औषधियां जैसे – अमृतारिष्ट, गिलोय सत्व, सितोपलादि चूर्ण, आमलकी रसायन, तुलसी अर्क, लशुनादि वटी का नियमित सेवन कर सकते हैं।

(कृपया आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से इन औषधियों का सेवन करें)

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